November 28, 2022

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विकास दुबे के आतंक से आजाद हुआ बिकरू, आरक्षित सीट पर मधु बनी ग्राम प्रधान

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यूथ न्यूज़ ब्यूरो, कानपुर:

बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात जैसे इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हुई थी। वैसे ही बिकरू व इसके आसपास के गांवों में करीब 25 सालों से विकास दुबे का आतंक भी दर्ज था। 2 जुलाई की रात को विकास ने जैसे 8 पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतारा था उसके बाद पुलिस ने उस का आतंक उसके साथ ही समाप्त कर दिया था। रही बात क्षेत्र में आतंक की तो वह भी रविवार को हुई पंचायत चुनावों की मतगणना के साथ खत्म हो गया।


करीब 25 सालों से जिस क्षेत्र में चुनाव के नाम पर खानापूरी होती थी उसी क्षेत्र में विकास के खात्मे के बाद इस बार चुनाव भी हुए और स्वतंत्र प्रत्याशी विजयी भी हुआ। पंचायत चुनाव में रविवार को हुई मतगणना में विकास का आतंक खत्म हो गया। रविवार को मतगणना में बिकरू गांव में आरक्षित सीट पर उम्मीदवार मधु ने जीत दर्ज कर अपने प्रतिद्वंदी बिंदु कुमार को 54 मतों से हरा दिया।

गैंगस्टर विकास दुबे की दहशत का यह आलम था कि लगभग 25 वर्षों तक होने वाले पंचायत चुनाव में सिर्फ और सिर्फ उसी का वर्चस्व रहा और ज्यादातर उसके परिवार के लोग निर्विरोध चुनाव जीते। अपराधी विकास दुबे खुद तो निर्विरोध चुनाव जीतना ही था साथ में दो बार भाई की पत्नी को नौकरी पत्नी व करीबी को निर्विरोध प्रधान बना चुका था।

लेकिन इस बार बिकरू गांव की कुछ अलग ही तस्वीर दिखाई दिए। बिकरू गांव इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था और यहां इस बार 10 दावेदारों ने प्रधान पद के लिए नामांकन कराया था। बिकरू ही नहीं अपराधी विकास दुबे का आसपास के एक दर्जन ग्राम पंचायत में भी दबदबा रहता था।

इन सभी पंचायतों में विकास दुबे की मर्जी के खिलाफ कोई भी जिला पंचायत प्रत्याशी गांव में प्रवेश नहीं करता था और अगर गांव में पहुंच भी गया था गैंगस्टर का इतना आतंक था कि गांव वाले किसी भी प्रत्याशी से बात नहीं करते थे और प्रत्याशी को उल्टे पैर वापस होना पड़ता था। लेकिन आज चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों स्वतंत्र होकर वोट मांगते घूम रहे देखें वही मतदाता भी अपनी इच्छा मतदान करने को स्वतंत्र दिखाई दिए और परिणाम सामने हैं।