September 29, 2022

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iit kanpur ने सूजन संबन्धी बीमारी का रिसर्च किया पब्लिश

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आईआईटी (IIT) कानपुर ने क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के सहयोग से सूजन-संबंधी(इंफ्लेमेटरी) रोगों में पथ-प्रदर्शक अनुसंधान के परिणाम प्रकाशित किए

अनुसंधान पुरानी सूजन संबंधी बीमारी के इलाज के लिए संभावित चिकित्सीय लक्ष्य की पहचान करता है।

यूथ न्यूज़ ब्यूरो, कानपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर (IIT-K) और द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड (UQ) ने आज सूजन संबंधी बीमारी में एक पथ-प्रदर्शक अंतरराष्ट्रीय सहयोगी शोध के परिणाम प्रकाशित किए। आणविक और कोशिका जीवविज्ञान पर समीक्षा करने वाली अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘मॉलिक्यूलर सेल’ में प्रकाशित निष्कर्ष एक प्रोटीन रिसेप्टर C5aR2 पर नई रोशनी डालते हैं, यह कई प्रतिरक्षा और सूजन-संबंधी प्रक्रियाओं के मॉडरेशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कई पुरानी सूजन-संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए संभावित चिकित्सीय लक्ष्य के रूप में इसके उपयोग की पड़ताल करता है। इस शोध में भारत से प्रोफेसर अरुण शुक्ला आईआईटी कानपुर के साथ असुका इनौ, तोहोकू विश्वविद्यालय, जापान और स्टीफन ए०लापोर्टे, मैकगिल विश्वविद्यालय, कनाडा के शोधकर्ताओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग किया गया।
यह पहली बार है कि शोधकर्ताओं ने प्रतिरक्षा प्रणाली के भीतर प्रमुख अणुओं की कार्यप्रणाली की पहचान की है जो सूजन से लड़ने में मदद कर सकते हैं तथा सूजन संबंधी बीमारियों के कारक है। शोध के निष्कर्ष नई दवा अणुओं में आगे के शोध में मदद करेंगे जो C5a के लिए रिसेप्टर्स पर कार्य कर सकते हैं जो एक शक्तिशाली
प्रतिरक्षा अणु है जो कैंसर, रूमेटोइड गठिया, सेप्सिस और यहां तक कि कोविड-19 जैसे कई प्रतिरक्षा से जुड़े सूजन संबंधी बीमारियों से जुड़ा हुआ है।
प्रो. अभय करंदीकर, निदेशक, आईआईटी कानपुर ने कहा कि, “इस महत्वपूर्ण शोध पत्र का प्रकाशन जीवन विज्ञान में चुनौतीपूर्ण अनुसंधान करने के लिए आईआईटी कानपुर की क्षमताओं का प्रमाण है। हम आशान्वित हैं कि निष्कर्षों से पुरानी इंफ्लेमेटरी संबंधी बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में नई रोशनी मिलेगी।”
यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड (UQ) प्रो० ट्रेंट वुड्रूफ ने कहा कि, शोध ने रोगाणुओं और चोट के लिए शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार प्रतिरक्षा प्रणाली के हिस्से की जांच की, जिसे ‘पूरकप्रणाली’ के रूप में
जाना जाता है। उन्होंने कहा, “अनुचित तरीके से सक्रिय होने पर, सिस्टम सेप्सिस, कोविड-19, स्ट्रोक, दिल के दौरे, कैंसर और मस्तिष्क की बीमारियों जैसे रोगों का कारक बनता है। शोधकर्ताओं के लिए यह समझना वास्तव में चुनौतीपूर्ण रहा है कि यह प्रोटीन अपनी असामान्य संरचना के कारण कैसे सक्रिय होता है।”

इस शोध के मुख्य अन्वेषक प्रोफेसर अरुण शुक्ला ने बताया कि, “C5aR2 पहले से ज्ञात मार्ग के बजाय अरेस्टिन प्रोटीन के रूप में जाने वाले सिग्नल विनियमन प्रोटीन पर निर्भर करता है। हमारे अध्ययन ने C5aR2 और अरेस्टिन प्रोटीन के बीच परस्पर क्रिया की जांच की, तथा उन अणुओं की जांच की जिन्होंने दोनों के बीच संबंध को सक्रिय किया। C5aR2 के सक्रिय होने पर हमें प्रमुख और विशिष्ट सेल सिग्नल मिले, जो सूजन में प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर सकते हैं, ”l
प्रोफेसर अरुण शुक्ला ने कहा कि “इन निष्कर्षों ने बीमारी में चिकित्सीय मॉड्यूलेशन के लिए अरेस्टिन प्रोटीन की और खोज के लिए एक रूपरेखा प्रदान की। अब हम इन शोध निष्कर्षों को रोग मॉडल में आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं l यह शोध संभावित रूप से वैज्ञानिकों को सूजन संबंधी विकारों के इलाज के लिए बेहतर दवा डिजाइन करने में सक्षम बनाता है”।
पेपर कालिंक:
https://www.cell.com/molecular-cell/fulltext/S1097-2765(21)00741-3

Profesior dr.arun shukla

प्रो० अरुण० के० शुक्ला के बारे में

डॉ. अरुण शुक्ला ने नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जैवप्रौद्योगिकी में एम.एससी और फ्रैंकफर्ट जर्मनी में मैक्सप्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ बायोफिजिक्स में प्रोफेसर हार्टमुटमिशेल के साथ पीएचडी की
पढ़ाई की। डॉ. शुक्ला बाद में ड्यूक विश्वविद्यालय में प्रो. रॉबर्ट जे. लेफ़कोविट्ज़ की प्रयोगशाला में एक शोध सहयोगी के रूप में शामिल हुए और उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रो.ब्रायन कोबिल्का की प्रयोगशाला के साथ बहुत करीबी सहयोग से काम किया। अप्रैल 2014 में आईआईटी कानपुर बीएसबीई
संकाय में शामिल होने से पहले, वह ड्यूक विश्वविद्यालय, उत्तरी कैरोलिना, यूएसए में चिकित्सा विभाग में सहायक प्रोफेसर थे। उन्हें हाल ही में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, 2021 से सम्मानित किया गया है।

प्रो० ट्रेंट वुड्रूफ़ के बारे में
डॉ. वुड्रूफ़ क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में औषध विज्ञान के एक प्रोफेसर हैं, जो न्यूरो अपक्षयी विकारों के लिए नए चिकित्सीय उपचार खोजने के उद्देश्य से एक शोध दल का नेतृत्व करते हैं। प्रो० वुड्रूफ़ का विशिष्ट शोध मस्तिष्क में
जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली और रोग के प्रसार में तंत्रिका सूजन की भूमिका के इर्द-गिर्द घूमता है। उनके वर्तमान काम का एक प्रमुख फोकस क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में मोटर न्यूरॉन रोग (एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) हंटिंगटन रोग और पार्किंसंस रोग के मॉडल में विकसित नई दवाओं का परीक्षण करने के साथ-साथ सेप्सिस और इस्किमिया-रीपरफ्यूजन सहित तीव्र सूजन संबंधी विकारों में सक्रिय रुचि बनाए रखना है।